तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था और दुनिया में बढ़ते युद्ध का दायरा: क्या भारत के सामने नई चुनौतियाँ हैं?
भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और दुनिया में बढ़ता युद्ध का दायरा: क्या भारत की विकास दर पर पड़ेगा असर?
भारत एक विशाल आबादी वाला देश है। आज के समय में भारत की आबादी लगभग 150 करोड़ के आसपास है, जो इसे दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनाती है। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी आर्थिक विकास दर को काफी अच्छा और प्रभावशाली तरीके से बनाए रखा है।
| वित्तीय वर्ष | भारत की GDP Growth / विकास दर |
|---|---|
| 2020-21 | -5.8% |
| 2021-22 | 9.7% |
| 2022-23 | 7.2% |
| 2023-24 | 7.2% |
| 2024-25 | 7.1% |
| 2025-26 | 7.7% |
नोट: 2020-21 और 2021-22 के आंकड़े पुरानी GDP series (Base Year 2011-12) पर आधारित हैं। 2022-23 से आंकड़े नई GDP series (Base Year 2022-23) के अनुसार हैं। नई series की back-series 2020-21 और 2021-22 के लिए अभी उपलब्ध नहीं है।
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| India GDP Growth के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत विकास दर बनाए रखी है। |
अगर भारत की पिछले कुछ वर्षों की आर्थिक विकास दर को देखें,
तो वित्त वर्ष 2023-24 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर लगभग 7.2 प्रतिशत रही थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 प्रतिशत रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर बढ़कर लगभग 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान दर्ज किया गया है। यानी वैश्विक स्तर पर लगातार आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी मजबूत विकास गति को बनाए रखा है।
लेकिन जिस तरह से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ, उसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच भी एक छोटा युद्ध हुआ। वहीं, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण दुनिया में तनाव और बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही कई अन्य देश और संगठन भी इन संघर्षों से प्रभावित हो रहे हैं और युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष भी इसी बढ़ते तनाव का एक उदाहरण है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दुनिया में बढ़ते इन युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों का भारत की आर्थिक विकास दर पर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा? भारत ने पिछले तीन वर्षों में लगभग 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर बनाए रखी है, लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर युद्धों का दायरा और बढ़ता है, तो क्या भारत इसी गति से आगे बढ़ पाएगा?
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क्या आने वाले समय में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक व्यापार में रुकावट, सप्लाई चेन पर दबाव और महंगाई जैसी चुनौतियां भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकती हैं? या फिर भारत की मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश और बड़ा बाजार इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखेगा?
1991 के आर्थिक सुधार और भारत की मजबूती-
इन्हीं सभी सवालों के जवाब हम अपने इस आर्टिकल में जानेंगे।
भारत हमेशा से एक विकासशील देश रहा है और इसने अपनी विकास दर तथा GDP Growth को बढ़ाने के लिए समय-समय पर कई सख्त कदम उठाए हैं। साथ ही, उदारवादी आर्थिक नीतियों की वजह से भी भारत अपनी विकास दर को लगातार बेहतर बनाए रखने में सफल रहा है।
अगर इसकी सबसे महत्वपूर्ण शुरुआत की बात करें, तो वर्ष 1991 में जब डॉक्टर मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे, उस समय अपनाई गई उदारवादी आर्थिक नीतियाँ भारत के लिए एक बड़ा turning point साबित हुईं। इन नीतियों के बाद भारत ने आर्थिक क्षेत्र में एक नए मुकाम की ओर बढ़ने की कोशिश शुरू की और धीरे-धीरे भारतीय अर्थव्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले।
वैश्विक संघर्ष और भारत पर इसका असर
इसी दौरान चीन ने भी अपनी विकास दर को काफी तेजी से बढ़ाया और कई वर्षों तक उसकी आर्थिक विकास दर double digit में रही। हालांकि विकास दर के मामले में भारत चीन से कुछ पीछे रहा है, लेकिन भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश के लिए लगातार आर्थिक विकास दर को बनाए रखना अपने आप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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| Global War और Geopolitical Tensions का Indian Economy और GDP Growth पर असर पड़ सकता है। |
लेकिन आज दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें भारत के सामने भी कई नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और तनाव बढ़ रहा है, crude oil के भाव में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा है। तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर परिवहन, उद्योग, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर पड़ता है। इसलिए दुनिया में होने वाला कोई भी बड़ा आर्थिक या राजनीतिक बदलाव भारत को भी प्रभावित करता है।
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कभी crude oil की कीमत 120 डॉलर के आसपास पहुंच जाती है, तो कभी यह 80 डॉलर के आसपास आ जाती है। इसी बीच अमेरिका कभी tariff लगा देता है और कभी tariff में ढील दे देता है। दूसरी तरफ अमेरिका और चीन के बीच trade war की स्थिति भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिश्चितता पैदा करती रहती है।
इन सभी परिस्थितियों को देखकर ऐसा लगता है कि आज पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आर्थिक विकास, व्यापार, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति—हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। भारत भी इस बदलती हुई वैश्विक परिस्थिति के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके सामने लगातार नई चुनौतियाँ आती जा रही हैं।
भारत के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि देश में एक मजबूत सरकार है। यह मिली-जुली सरकार नहीं है, बल्कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार है, जो अपने हिसाब से देश के हित में महत्वपूर्ण फैसले लेने में सक्षम है। इसके साथ ही देश का विपक्ष भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भूमिका निभा रहा है और अपनी बात को मजबूती से सामने रख रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन वैश्विक चुनौतियों के बीच देश में बड़े स्तर पर शांति और स्थिरता का माहौल बना हुआ है। यही स्थिरता भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच नए अवसर तलाशने में मदद कर सकती है।


