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परिसीमन (Delimitation) बिल क्या है-क्या मानसून सत्र में लोकसभा में भाजपा यह विधेयक पारित कर सकती है-टीएमसी(TMC) के टूटने से भाजपा को फायदा

परिसीमन (Delimitation) बिल क्या है-क्या मानसून सत्र में लोकसभा में भाजपा यह विधेयक पारित कर सकती है-टीएमसी(TMC) के टूटने से भाजपा को फायदा

 परिसीमन (Delimitation) बिल-

 परिसीमन जनसंख्या के हिसाब से किया जाता है। जिसकी जितनी जनसंख्या, उसको उतनी सीट। अब वह लोकसभा हो या विधानसभा। यह सब आखिरी बार 1976 में हुआ था.

उस समय लोकसभा की सीट 543 तय की गई थी और बाद में इसे 2026 तक ऐसे ही रखा गया। लेकिन अब भारत में जनगणना हो रही है और उसी हिसाब से 2029 में लोकसभा की सीटें बढ़ानी होंगी. पर उसके लिए परिसीमन विधेयक लाना होगा, यानी संविधान संशोधन करना होगा। इसके लिए 2/3 बहुमत होना आवश्यक होगा और वह 362 होता है.

महिला आरक्षण - 

परिसीमन के अंतर्गत महिला आरक्षण को भी बढ़ाकर 33% करने का प्रावधान होगा, जिससे महिलाओं की लोकसभा में संख्या बढ़ेगी. इससे देश में महिलाएं एक मजबूत शक्ति बनकर उभरेंगी. पर पिछली बार जब सरकार ने यह सब किया, तो वह विधेयक पारित नहीं हो सका क्योंकि एनडीए को 2/3 बहुमत नहीं था.



अब इसमें विवाद क्या आ रहा है - 

दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनकी लोकसभा की सीटें कम हो जाएंगी क्योंकि दक्षिण भारत में जनसंख्या वृद्धि दर कम है, जबकि उत्तर भारत में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है। हालांकि सरकार ने कोशिश की थी कि उन्हें कोई नुकसान न हो, लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो सकी.

यानी परिसीमन का मतलब भारत में चुनावी क्षेत्रों और सीटों को नई जनसंख्या के अनुसार सही करना तथा महिलाओं के आरक्षण को लागू करने का रास्ता तैयार करना है.


क्या मानसून सत्र में लोकसभा में भाजपा यह विधेयक पारित कर सकती है-

लोकसभा में इस समय भाजपा के 293 सांसद हैं और बहुमत के लिए भाजपा को 362 या 360 का आंकड़ा हासिल करना होगा। इस हिसाब से तो नहीं लगता कि भाजपा इस विधेयक को पारित करा सकती थी, पर अब सब बदल रहा है। कल यानी 14 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC)) के 20 सांसदों ने एक नई पार्टी में विलय कर एनडीए को समर्थन दिया। इससे यह आंकड़ा 293 + 20 = 313 हो जाता है.

फिर भी 360 से अभी भाजपा बहुत दूर है, लेकिन यदि डीएमके भी एनडीए को समर्थन दे दे, तो उसके 22 सांसद होते हैं, जिससे यह संख्या 335 तक पहुंच जाती है. और अगर कुछ छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों का समर्थन लिया जाए, तो एनडीए 362 तक पहुंचकर परिसीमन विधेयक पारित करा सकता है. लेकिन इसमें एनडीए को बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

यदि कुछ विपक्षी दल इस विधेयक का समर्थन कर दें या मतदान के दौरान कुछ सांसद अनुपस्थित रहें तो स्थिति बदल सकती है। इसलिए यह कहना कि यह विधेयक निश्चित रूप से पारित हो जाएगा या निश्चित रूप से पारित नहीं होगा अभी सही नहीं होगा. इसका फैसला काफी हद तक राजनीतिक सहमति और संसद में उस समय मौजूद संख्या बल पर निर्भर करेगा.


टीएमसी(TMC) के टूटने से भाजपा को फायदा-

अभी कुछ दिनों पहले राहुल गांधी ने 2 से 3 बार कहा कि साल के अंत तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने ऐसा क्यों कहा, यह बात किसी को समझ नहीं आ रही थी क्योंकि एनडीए के पास तो बहुमत है, फिर सरकार कैसे गिर जाएगी? पर राजनीति बहुत अस्थिर होती है। अगर कोई दल समर्थन वापस ले ले, तो सरकार गिर सकती है.

यानी या तो जेडीयू या फिर दूसरे दल अगर एनडीए से अलग होते हैं, तो भाजपा 240 सीटों के साथ सरकार नहीं बना सकती क्योंकि बहुमत के लिए 282 सीटें चाहिए। पर अब टीएमसी से अलग हुए 20 सांसद भाजपा को बहुत अच्छी स्थिति में रखेंगे.

बंगाल में टीएमसी का कमजोर होना भाजपा को एक बहुत बड़े राज्य में अपने पांव फैलाने में मदद करेगा क्योंकि वाम दल तो बंगाल में पहले से ही कमजोर हैं और टीएमसी अब बिखर चुकी है। वहीं कांग्रेस तो पहले से ही पृष्ठभूमि में थी ही नहीं। इसलिए अब भाजपा अकेली बड़ी पार्टी बची है बंगाल में.

FAQ -

1. परिसीमन (Delimitation) क्या होता है?
परिसीमन वह प्रक्रिया है जिसके तहत नई जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों की संख्या में बदलाव किया जाता है, ताकि सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.

2. परिसीमन विधेयक की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
जनसंख्या में समय के साथ बदलाव आता रहता है। ऐसे में विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की आबादी के अनुसार सीटों का पुनर्निर्धारण करने के लिए परिसीमन विधेयक की आवश्यकता पड़ती है.

3. परिसीमन को लेकर विवाद क्यों हो रहा है?

दक्षिण भारत के कई राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या वृद्धि दर कम होने के कारण उनकी लोकसभा सीटें घट सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या वृद्धि अधिक होने से वहां सीटों की संख्या बढ़ सकती है। इसी वजह से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.

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