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यूरोप और अमेरिका की दूरी: क्या हो रहा है?

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  अमेरिका से दूर जा रहा यूरोप: जानिए इसके कारण दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप एक-दूसरे के करीब आए और नाटो (NATO) जैसे संगठन का निर्माण हुआ। और फिर अमेरिका और यूरोप दोनों ने एक रणनीतिक साझेदारी की जो कि आज तक चल रही है। दोनों ने रक्षा, उद्योग और भी कई क्षेत्रों में एक साथ काम किया. यह सब सोवियत संघ के कारण हुआ. यूरोप को सोवियत संघ से खतरा था इसलिए अमेरिका उनका विशेष साझेदार बना जो कि आज तक चल रहा है। पर पिछले कुछ सालों में अमेरिका और यूरोप के बीच तनातनी देखने को मिल रही है. यूरोप अब खुद अपने हितों को देखने की कोशिश कर रहा है, वह अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करना चाहता है। पर ऐसा क्या हुआ कि यूरोप अब आत्मनिर्भर होना चाहता है. अमेरिका से दूर जा रहा यूरोप वैैसे यूरोप के बदलते रुख के पीछे पिछले कुछ वर्षों की घटनाएं हैं, जिनको हम एक-एक करके देखेंगे- (1) अमेरिका की राजनीतिक अस्थिरता और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति-   जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) की नीति अपनाई और बार-बार नाटो (NATO) को एक पुराना संगठन बताया और ...

यूरोप और अमेरिका की दूरी: क्या हो रहा है?

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  अमेरिका से दूर जा रहा यूरोप: जानिए इसके कारण दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोप एक-दूसरे के करीब आए और नाटो (NATO) जैसे संगठन का निर्माण हुआ। और फिर अमेरिका और यूरोप दोनों ने एक रणनीतिक साझेदारी की जो कि आज तक चल रही है। दोनों ने रक्षा, उद्योग और भी कई क्षेत्रों में एक साथ काम किया. यह सब सोवियत संघ के कारण हुआ. यूरोप को सोवियत संघ से खतरा था इसलिए अमेरिका उनका विशेष साझेदार बना जो कि आज तक चल रहा है। पर पिछले कुछ सालों में अमेरिका और यूरोप के बीच तनातनी देखने को मिल रही है. यूरोप अब खुद अपने हितों को देखने की कोशिश कर रहा है, वह अपनी निर्भरता अमेरिका से कम करना चाहता है। पर ऐसा क्या हुआ कि यूरोप अब आत्मनिर्भर होना चाहता है. अमेरिका से दूर जा रहा यूरोप वैैसे यूरोप के बदलते रुख के पीछे पिछले कुछ वर्षों की घटनाएं हैं, जिनको हम एक-एक करके देखेंगे- (1) अमेरिका की राजनीतिक अस्थिरता और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति-   जब से डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, उन्होंने 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) की नीति अपनाई और बार-बार नाटो (NATO) को एक पुराना संगठन बताया और ...

परिसीमन (Delimitation) बिल क्या है-क्या मानसून सत्र में लोकसभा में भाजपा यह विधेयक पारित कर सकती है-टीएमसी(TMC) के टूटने से भाजपा को फायदा

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  परिसीमन (Delimitation) बिल-  परिसीमन जनसंख्या के हिसाब से किया जाता है। जिसकी जितनी जनसंख्या, उसको उतनी सीट। अब वह लोकसभा हो या विधानसभा। यह सब आखिरी बार 1976 में हुआ था. उस समय लोकसभा की सीट 543 तय की गई थी और बाद में इसे 2026 तक ऐसे ही रखा गया। लेकिन अब भारत में जनगणना हो रही है और उसी हिसाब से 2029 में लोकसभा की सीटें बढ़ानी होंगी. पर उसके लिए परिसीमन विधेयक लाना होगा, यानी संविधान संशोधन करना होगा। इसके लिए 2/3 बहुमत होना आवश्यक होगा और वह 362 होता है. महिला आरक्षण -   परिसीमन के अंतर्गत महिला आरक्षण को भी बढ़ाकर 33% करने का प्रावधान होगा, जिससे महिलाओं की लोकसभा में संख्या बढ़ेगी. इससे देश में महिलाएं एक मजबूत शक्ति बनकर उभरेंगी. पर पिछली बार जब सरकार ने यह सब किया, तो वह विधेयक पारित नहीं हो सका क्योंकि एनडीए को 2/3 बहुमत नहीं था. अब इसमें विवाद क्या आ रहा है -  दक्षिण भारत के राज्यों को डर है कि उनकी लोकसभा की सीटें कम हो जाएंगी क्योंकि दक्षिण भारत में जनसंख्या वृद्धि दर कम है, जबकि उत्तर भारत में जनसंख्या वृद्धि दर अधिक है। हालांकि सरकार ने कोशिश की थी कि उ...