सदियों पुराना व्यापारिक मार्ग जो आज बन चुका बारूद का ढेर - Strait of Hormuz
अगर हम दुनिया के नक्शे को ध्यान से देखते है तो बहुत से महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते दिखाई देते है उनमें से एक रास्ता ऐसा है जो अपने एक छोर से महज 33 किलोमीटर चोडा है उसका नाम है - स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz)।
ऐसा लगता है कि एक समुद्री रास्ता है जो ओमान और ईरान के बीच है पर मामूली से दिखने वाले इस रास्ते से दुनिया का 20% Oil Export होता है।
यह कोई साधारण समुद्री रास्ता नही है बल्कि पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था की रीढ की हड्डी है जैसा कि 20% Oil का व्यापारिक रास्ता है Strait of Hormuz ।
अगर दुसरे शब्दो में कहे तो यह एक चोक Point बन चुका है। आज इस समुद्री रास्ते पर जहाज जाने से डरते है क्योंकि अब वहाँ बारुदी ड्रोन, वॉरशीप, मिसाइले आदि तैनात है, ~~ज~~
हम इस लेख में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का इतिहास, भूगोल और आज के समय में वहाँ के हालात के बारे में जानेंगे-
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का भूगोल और उसकी रणनीतिक बनावट
किसी भी क्षेत्र की बनावट और उसकी उपस्थिति भूगोल तय करता है क्योंकि अगर भौगोलिक दृष्टि से वह क्षेत्र उपयोगी ज्यादा है तो आस-पास के देशो को रोचक विषय बन जाता है और हॉर्मुज के साथ भी यही हुआ है।
हॉर्मुज उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान व UAE को अलग करता है, दूसरी तरफ जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी व अरब सागर को जोड़ता है। अब सवाल यह बनता है की जब UAE और ओमान ये सब देश में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज मे ही है तो ईरान इसपर ज्यादा नियंत्रण कैसे करता है?भूगोल ईरान को अधिक फायदा देता है क्योंकि हॉर्मुज में कुछ महत्त्वपूर्ण द्वीप जैसे हॉर्मुज द्वीप, लार्क, कश्म ये सब ईरान के अधिकार क्षेत्र मे आते हैं जिससे उसे पुरे रास्ते पर सैन्य बढ़त देखने की मिलती है।
स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज का ऐतिहासिक गौरव व सिल्क रुट का संबंध —
जहाँ आज युद्ध का मैदान बन चुके हॉर्मुज में कभी व्यापारिक संस्कृतियों का मिलन था चीन का रेशम, भारत के मसाले, फारसीयो का कालीन और अरब के घोड़ो के व्यापार का केंद्र हुआ करता था।
20 वीं सदी की शुरुआत में इस क्षेत्र की किस्मत हमेशा के लिए बदल गई क्योंकि इस क्षेत्र काला सोना यानि कच्चे तेल भण्डार की खोज हुई जिसके बाद UAE, ईरान, इराक, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशो को बहुत फायदा हुआ, वहाँ लोगो का जीवनस्तर बढ़ा, दुनिया मे औद्योगिक क्रांति हुई।
भारत के लिए Strait Of Hormuz के मायने क्या है
भारत अपने कच्चे तेल का 85% से ज्यादा आयात करता है अगर हॉर्मुज में कोई हलचल होती है तो इसका सीधा असर भारत के लोगो की रसोई व फैक्ट्रियो तक पड़ता है।
युद्ध से भारत में महंगाई बढ़ती है दूसरी तरफ खाड़ी देशो मे 1 करोड़ भारतीय काम करते है उनपर खतरा होता है।
अगर विकल्प की बात करे तो हॉर्मुज का विकल्प है?
इसका सीधा जवाब हाँ तो नहीं हो सकता पर खाड़ी देशो ने कोशिश की है। खाड़ी देशो ने दो पाईपलाईन लगायी है -
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाईन यह कच्चे तेल को फारस की खाड़ी से लाल सागर तक पहुँचाती है पर समस्या यह कि लाल सागर मे हूती विद्रोहियो के कारण एक नया युद्ध क्षेत्र बन गया है।
UAE की हब्शान - फुजैराह पाईपलाईन - यह अबू धाबी के तेल को सीधे ओमान की खाड़ी तक लाती है जहाँ फुजैराह बंदरगाह है।
लेकिन ये दोनो पाईपलाईन 2 करोड़ बैरल तेल प्रतिदिन को संभाल नहीं सकती है।
निष्कर्ष -
आज जो मार्ग पूर्व और पश्चिम को जोड़ता था, आज के समय में बड़े-बड़े देशों के लिए युद्ध का मैदान बन गया है। स्टेट ऑफ होर्मुज़ में अभी के समय शांति तो है, पर कभी भी युद्ध की आग लग सकती है। 21वीं सदी में दुनिया कितनी भी आगे बढ़ जाए, पर स्टेट ऑफ होर्मुज़ हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
आज जो मार्ग पूर्व और पश्चिम को जोड़ता था, आज के समय में बड़े-बड़े देशों के लिए युद्ध का मैदान बन गया है। स्टेट ऑफ होर्मुज़ में अभी के समय शांति तो है, पर कभी भी युद्ध की आग लग सकती है। 21वीं सदी में दुनिया कितनी भी आगे बढ़ जाए, पर स्टेट ऑफ होर्मुज़ हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
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